Chakradhari
Chakradhari is from the album Bhakti Songs which came out in 2026. Vinay Katoch, Siddharth has given the vocals and Vinay Katoch has made the music for this song. Vinay Katoch, Siddharth has written the lyrics of this song.
Chakradhari Song Download
Chakradhari Vinay Katoch Lyrics
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
हरे राम हरे राम
मुरलीधर आओ
आओ विपदा घिर आयी
मुरलीधर आओ
आओ विपदा घिर आयी
द्रोपदी रोवे लाज बचाओ
आओ आओ गिरधारी
संकट हर लो ना
साहस भर दो ना
जपता हूँ बस नाम तेरा
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतक्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतक्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
ध्यान तेरा व्याख्यान तेरा
करे दास तेरा ये पुकारे कहीं से
नाम तेरा गुणगान तेरा
तेरे कानों में पड़ जाये कहीं से
बांस तेरा और धाम तेरा
मुरली की धुन बज जाये कन्हैया
श्वांस तेरा हो साथ तेरा
बस ये जीवन तर जाये कहीं से
मैं सुना के संसार गाथा
घनश्याम भेंट कर दूँ
गुणों से है परे जो पीड़ा बता के
जब सुजल नेत्र कर दूँ
मैं जब चूर बैठा पीड़ा बताऊ
तेरे अलावा किस शरण जाऊ
मन में ये एक बस बात लाके
दुःख तेरे नाम कर दूँ
मधुसुदना, वध पूतना का
जैसे किया था तुमने
तुम बने थे सारथी
मुझ पर्थ के
जीवन साधा तुमने
वैसे ही...
करुणा का एक धनुष बना
और कृपा बाण से युक्त सदा
वर्षा बाण की कर दो जैसे
वो युद्ध करे तुमने
अब मैं कर्तव्यों से विमुख पड़ा
गांडीव हाथ से छूट रहा
शरीर कांपता दृश्य देख
मेरे देह का है हर रोम खड़ा
हे केशव मेरी बुद्धि भ्रम में
रह ना सकूँ अभी और खड़ा
गुरु तुम्हें है माना
अब हे श्याम आओ
तेरी शरण पड़ा
हां..
मुरलीधर आओ
आओ विपदा घिर आयी
मुरलीधर आओ
आओ विपदा घिर आयी
अर्जुन बोले राह दिखाओ
आओ आओ गिरधारी
संकट हर लो ना
साहस भर दो ना
जपता हु बस नाम तेरा
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतक्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने
प्रणतक्लेश नाशाय गोविन्दाय नमो नमः
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्
परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम्
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे
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