Vrindavan Mero Vrindavan

Vrindavan Mero Vrindavan

Lyricist: Traditional

Duration: 11:46 Min

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Vrindavan Mero Vrindavan is a song from the album Bhakti Songs. It came out in 2026. The lyrics are written by Traditional.

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Vrindavan Mero Vrindavan Lyrics


श्यामा हृदय कमल सो प्रगटयो, और श्याम हृदय कु भाए।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


सब सुख सागर रूप उजागर, रहे वृंदावन धाम।

सब सुख सागर रूप उजागर, रहे वृंदावन धाम।

रूप गोस्वामी प्रगट कीयो जहां गोविंद रूप निधान।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


बिहरत निस दिन कुंज गलीन में, ब्रज जग मन सुख धाम।

बिहरत निस दिन कुंज गलीन में, ब्रज जग मन सुख धाम।

मदन मोहन को रूप निरख के सनातन बली बली जाये।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


गोपी ग्वाल सब हीय उर धाये, प्यारो गोपीनाथ।

गोपी ग्वाल सब हीय उर धाये, प्यारो गोपीनाथ।

मधुसूदन जिन कंठ लगायो, जहां हो रही जय जयकार।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


गोपाल भट्ट की ह्रदय वेदना, प्रग्टयो शालिग्राम।

गोपाल भट्ट की ह्रदय वेदना, प्रग्टयो शालिग्राम।

रूप सुधा को खान हमारो श्री राधा रमन जु लाल।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


आतुर होये हरिवंश पुकारो राधा राधा नाम।

सघल कुंज यमुना तट आयो श्री राधा वल्लभ लाल।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


जुगल किशोर कु लाड लडायो, नवल कुंज हीये माये।

जुगल किशोर कु लाड लडायो, नवल कुंज हीये माए।

कुंज नीकुंजन की रज धारे, जहां व्यास युगल यश गाए।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


भुवन चतुरदस की सुंदरता, निधिवन करत बिहार।

भुवन चतुरदस की सुंदरता, निधिवन करत बिहार।

श्यामा प्यारी बांके बिहारी,

श्यामा प्यारी कुंज बिहारी और जय जय श्री हरिदास।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


जिनकी कृपा से यह रस प्रगटयो वृंदावन अभिराम।

जिनकी कृपा से यह रस प्रगटयो वृंदावन अभिराम।

सत्यनिधीन को हीय उजियारो, हम सबको है

प्राण पियारो, हमारे गिरधरलाल।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


श्यामा हृदय कमल सो प्रगटयो, और श्याम हृदय कु भाए।

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…


वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…

वृंदावन प्यारो वृंदावन… वृंदावन प्यारो वृंदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…

वृदावन मेरो वृदावन… वृदावन मेरो वृदावन…

वृंदावन मेरो वृंदावन… वृंदावन मेरो वृंदावन…

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